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Fundamentals of Computer – Complete Notes By Praveen Jangid

 

अध्याय Computer Fundamentals

 Computer Fundamentals वह अध्याय है जिसमें कंप्यूटर से संबंधित सभी मूलभूत और आवश्यक जानकारियाँ सरल एवं व्यवस्थित रूप में दी जाती हैं। यह कंप्यूटर शिक्षा की नींव है। जिस प्रकार किसी भवन को मजबूत बनाने के लिए उसकी नींव का मजबूत होना आवश्यक है, उसी प्रकार कंप्यूटर विषय में आगे बढ़ने के लिए Fundamentals की स्पष्ट समझ होना बहुत जरूरी है। यदि विद्यार्थी इस अध्याय को ध्यानपूर्वक पढ़ लेता है, तो वह आगे आने वाले सभी कंप्यूटर विषयों को आसानी से समझ सकता है।

Computer Fundamentals के अंतर्गत हम यह सीखते हैं कि कंप्यूटर क्या है, यह कैसे कार्य करता है, इसके कितने प्रकार होते हैं, माउस क्या है और उसके प्रकार कौन-कौन से हैं, कीबोर्ड क्या है, मॉनिटर क्या है, CPU क्या होता है, कंप्यूटर की संरचना क्या है, कंप्यूटर का इतिहास क्या है तथा कंप्यूटर की विभिन्न पीढ़ियाँ कौन-सी हैं। इन सभी विषयों की प्रारंभिक और स्पष्ट जानकारी इसी अध्याय में प्राप्त होती है।

Fundamentals शब्द का अर्थ है मूलभूत या आधारभूत ज्ञान। अर्थात किसी भी विषय की वह प्रारंभिक जानकारी, जिस पर आगे की पूरी पढ़ाई आधारित होती है। इसलिए Computer Fundamentals का अर्थ है कंप्यूटर के बारे में बुनियादी जानकारी प्राप्त करना। जब कोई विद्यार्थी पहली बार कंप्यूटर सीखना शुरू करता है, तो उसे सबसे पहले यह समझना आवश्यक होता है कि कंप्यूटर वास्तव में क्या है, यह किस प्रकार इनपुट लेता है, CPU के माध्यम से डेटा को कैसे प्रोसेस करता है और आउटपुट किस प्रकार देता है। इन सभी प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाना ही Fundamentals का मुख्य उद्देश्य है।

इस अध्याय में कंप्यूटर के मुख्य भागों, उनके कार्यों, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के अंतर, मेमोरी के प्रकार तथा विभिन्न इनपुट और आउटपुट उपकरणों की जानकारी दी जाती है। इससे विद्यार्थी को कंप्यूटर की संपूर्ण आधारभूत संरचना समझ में आती है। जब यह आधार मजबूत हो जाता है, तब MS Word, Excel, PowerPoint, Tally, Internet, Programming और Networking जैसे विषयों को समझना बहुत आसान हो जाता है।

लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी परीक्षाओं और कंप्यूटर कोर्स की परीक्षाओं में Computer Fundamentals से संबंधित प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। इसलिए यह अध्याय केवल पढ़ने के लिए ही नहीं, बल्कि परीक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि विद्यार्थी Fundamentals को अच्छी तरह समझ लेता है, तो वह परीक्षा में आत्मविश्वास के साथ प्रश्नों का उत्तर दे सकता है।

अतः प्रत्येक कंप्यूटर विद्यार्थी के लिए आवश्यक है कि वह Computer Fundamentals को गंभीरता से पढ़े, समझे और उसका अभ्यास करे। यही अध्याय कंप्यूटर शिक्षा की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है, जो विद्यार्थी को तकनीकी ज्ञान की दुनिया में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास प्रदान करता है।

कंप्यूटर क्या होता है?

कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जो बिजली से चलती है और दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य करती है। यह इनपुट के रूप में डेटा को ग्रहण करता है, फिर सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम के निर्देशों के अनुसार उस डेटा को प्रोसेस करता है, और अंत में हमें आउटपुट के रूप में परिणाम प्रदर्शित करता है। सरल शब्दों में कहें तो कंप्यूटर एक ऐसी मशीन है जो डेटा लेती है, उसे संसाधित करती है और हमें उसका परिणाम दिखाती है।

Computer is an electronic machine which can accept data as input, process the data, and give output as result.

जब हम कीबोर्ड, माउस या किसी अन्य उपकरण की सहायता से कंप्यूटर में कोई जानकारी दर्ज करते हैं, तो वह इनपुट कहलाता है। कंप्यूटर का मुख्य भाग, जिसे CPU कहा जाता है, उस इनपुट को प्रोसेस करता है। प्रोसेसिंग के बाद जो परिणाम हमें मॉनिटर, प्रिंटर या अन्य आउटपुट उपकरणों के माध्यम से प्राप्त होता है, उसे आउटपुट कहा जाता है। इस प्रकार कंप्यूटर इनपुट, प्रोसेस और आउटपुट की प्रक्रिया पर कार्य करता है।

कंप्यूटर शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के Computare शब्द से हुई है। कुछ स्थानों पर इसकी उत्पत्ति Compute शब्द से भी बताई जाती है। इन दोनों शब्दों का अर्थ है गणना करना। प्रारंभ में कंप्यूटर का उपयोग मुख्य रूप से गणनाएँ करने के लिए किया जाता था, इसलिए इसका नाम कंप्यूटर पड़ा। हालांकि आज कंप्यूटर केवल गणना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लेखन, चित्र निर्माण, अकाउंटिंग, इंटरनेट, प्रोग्रामिंग, डिज़ाइनिंग और अनेक अन्य कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है।

इस प्रकार कंप्यूटर एक तेज, सटीक और विश्वसनीय मशीन है, जो हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। शिक्षा, बैंकिंग, रेलवे, अस्पताल, उद्योग, व्यापार और सरकारी कार्यालयों में इसका व्यापक उपयोग किया जा रहा है। आज के डिजिटल युग में कंप्यूटर का ज्ञान प्रत्येक विद्यार्थी के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है।

 

 

 

 


 


सबसे पहले एक महत्वपूर्ण बात समझना आवश्यक है कि COMPUTER का कोई आधिकारिक (Official) पूरा नाम नहीं होता। यह एक शब्द है जो लैटिन भाषा के Computare से बना है, जिसका अर्थ है गणना करना

लेकिन पढ़ाई और याद रखने की सुविधा के लिए कुछ लोग COMPUTER शब्द का एक Full Form बना देते हैं। यह केवल शैक्षिक उद्देश्य (Educational Purpose) के लिए होता है, न कि कोई वास्तविक या वैज्ञानिक पूर्ण रूप।

आम तौर पर COMPUTER का Full Form इस प्रकार बताया जाता है:

C Commonly                       (आम तौर पर)
O
Operated            (संचालित)
M
Machine              (मशीन / तंत्र)
P
Particularly                      (विशेष रूप से)
U
Used for               (प्रयुक्त)
T
Technical              (तकनीकी)
E
Educational                      (शैक्षणिक)
R
Research              (अनुसंधान)

अर्थात् —
Computer
एक ऐसी मशीन है जिसका उपयोग मुख्य रूप से तकनीकी, शैक्षिक, अनुसंधान और गणना संबंधी कार्यों के लिए किया जाता है।

सरल भाषा में समझें तो कंप्यूटर का उपयोग गणना करने, डेटा को प्रोसेस करने, जानकारी संग्रहित करने, शोध करने और विभिन्न तकनीकी कार्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

ध्यान रखें कि यह Full Form केवल समझाने के लिए बनाया गया है। वास्तव में Computer शब्द का कोई निश्चित और आधिकारिक पूरा नाम नहीं है।

इसलिए परीक्षा में यदि पूछा जाए कि COMPUTER का Full Form क्या है, तो उपरोक्त Full Form लिखा जा सकता है। लेकिन यदि प्रश्न शब्द की उत्पत्ति से संबंधित हो, तो सही उत्तर होगा कि यह शब्द Computare से बना है, जिसका अर्थ है गणना करना

 

कंप्यूटर की विशेषताएँ एवं लाभ

 

कंप्यूटर एक अत्यंत उपयोगी और शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जिसमें अनेक विशेषताएँ और लाभ पाए जाते हैं। आधुनिक युग में कंप्यूटर का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है, क्योंकि यह तेज गति, सटीकता और विश्वसनीयता के साथ कार्य करता है।

कंप्यूटर की सबसे बड़ी विशेषता उसकी गति है। कंप्यूटर एक सेकंड में लाखों गणनाएँ कर सकता है। जहाँ मनुष्य किसी जटिल गणना को करने में कई मिनट या घंटे लगा सकता है, वहीं कंप्यूटर वही कार्य कुछ ही क्षणों में कर देता है। यही कारण है कि गणना से जुड़े कार्यों में कंप्यूटर का उपयोग अधिक किया जाता है।

कंप्यूटर की दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता उसकी शुद्धता (Accuracy) है। यह कठिन से कठिन प्रश्नों का उत्तर बिना किसी गलती के दे सकता है, बशर्ते उसे सही निर्देश दिए गए हों। कंप्यूटर स्वयं गलती नहीं करता, बल्कि यदि कोई त्रुटि होती है तो वह गलत इनपुट या प्रोग्राम के कारण होती है।

कंप्यूटर में विशाल मात्रा में डेटा संग्रहित करने की क्षमता होती है। हम अपनी आवश्यकता के अनुसार बहुत अधिक जानकारी कंप्यूटर में सुरक्षित रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग कर सकते हैं। हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, SSD आदि के माध्यम से डेटा को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

आज बैंक, पोस्ट ऑफिस, रेलवे स्टेशन, अस्पताल आदि संस्थानों में कंप्यूटर का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। पैसों का लेन-देन, खाता प्रबंधन, डेटा एंट्री, बिलिंग, रिपोर्ट तैयार करना आदि कार्य कंप्यूटर की सहायता से आसानी और तेजी से किए जाते हैं।

कंप्यूटर में उच्च स्तर की सुरक्षा (Security) भी उपलब्ध होती है। हम पासवर्ड लगाकर अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डेटा को सुरक्षित रख सकते हैं। आधुनिक समय में साइबर सुरक्षा प्रणाली के माध्यम से डेटा को सुरक्षित रखने के लिए विशेष तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

वर्तमान समय में कंप्यूटर का उपयोग सुरक्षा और निगरानी के लिए भी किया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में कंप्यूटर की सहायता से गतिविधियों की निगरानी, ट्रैकिंग और नियंत्रण किया जाता है। रक्षा क्षेत्र में भी कंप्यूटर का उपयोग रणनीति बनाने और सुरक्षा प्रबंधन के लिए किया जाता है।

मनोरंजन के क्षेत्र में भी कंप्यूटर का विशेष महत्व है। आज लोग कंप्यूटर के माध्यम से फिल्में देखते हैं, गाने सुनते हैं, गेम खेलते हैं और ऑनलाइन सामग्री का आनंद लेते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी ऑनलाइन क्लास, डिजिटल पुस्तकें और अध्ययन सामग्री कंप्यूटर के माध्यम से उपलब्ध होती है।

व्यापार के क्षेत्र में कंप्यूटर ने क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। व्यापारी एक ही स्थान से अपने सभी कार्यों का प्रबंधन कर सकते हैं। वे स्टॉक का रिकॉर्ड रख सकते हैं, बिल बना सकते हैं, खातों का हिसाब रख सकते हैं और ऑनलाइन लेन-देन कर सकते हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

सरकारी कार्यालयों में भी कंप्यूटर का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। दस्तावेज तैयार करना, रिकॉर्ड सुरक्षित रखना, नागरिक सेवाएँ प्रदान करना, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आदि सभी कार्य कंप्यूटर के माध्यम से किए जाते हैं।

रेलवे, वायुयान सेवाओं और वैज्ञानिक अनुसंधान में भी कंप्यूटर का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। टिकट बुकिंग, समय सारणी प्रबंधन, उड़ान नियंत्रण, मौसम की जानकारी और वैज्ञानिक शोध कार्यों में कंप्यूटर की सहायता ली जाती है। वैज्ञानिक नई खोज और अनुसंधान के लिए भी कंप्यूटर का उपयोग करते हैं।

इन सभी विशेषताओं के अतिरिक्त कंप्यूटर के अनेक अन्य लाभ भी हैं, जिन्हें हम अपने दैनिक जीवन में देख सकते हैं। वर्तमान समय में कंप्यूटर हमारे जीवन का एक आवश्यक हिस्सा बन चुका है। इसके उपयोग से कार्यों में सरलता, गति और सटीकता आती है।

 

 

कंप्यूटर विकास का इतिहास

 

यदि हम कंप्यूटर के विकास के इतिहास की बात करें, तो इसका अर्थ है यह समझना कि कंप्यूटर की शुरुआत कैसे हुई, समय के साथ उसमें क्या-क्या परिवर्तन हुए, और धीरे-धीरे वह आधुनिक कंप्यूटर के रूप में कैसे विकसित हुआ। प्रारंभ में कंप्यूटर बहुत बड़े, भारी और सीमित कार्य करने वाले यंत्र हुआ करते थे। समय के साथ उनमें सुधार होता गया और आज वे तेज, छोटे और अत्यंत शक्तिशाली बन चुके हैं।

सबसे पहले जिस गणना यंत्र का उल्लेख मिलता है, वह अबेकस (Abacus) है।

 

 

 

 

 

 

अबेकस का निर्माण लगभग 16वीं शताब्दी में चीन में किया गया था। यह लकड़ी का बना एक यंत्र था, जिसमें तारों पर गोलाकार मनके (Beads) लगे होते थे। इन मनकों को आगे-पीछे सरकाकर जोड़, घटाना और कुछ हद तक वर्गमूल जैसी गणनाएँ की जाती थीं। यह आधुनिक कंप्यूटर नहीं था, लेकिन गणना करने की दिशा में यह पहला महत्वपूर्ण कदम था।

इसके बाद 1617 में स्कॉटलैंड के वैज्ञानिक जॉन नेपियर ने नेपियर बोन (Napier’s Bones) नामक एक गणना यंत्र का निर्माण किया। इस यंत्र में 0 से 9 तक के अंक विशेष रूप से लिखे होते थे, जिनकी सहायता से गुणा करना आसान हो जाता था। यह यंत्र मुख्य रूप से गुणा की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए बनाया गया था।

 

1642 में फ्रांस के वैज्ञानिक ब्लेज़ पास्कल ने पास्कलाइन (Pascaline) नामक एक यांत्रिक मशीन का निर्माण किया।

 

 

 

यह पहली यांत्रिक (Mechanical) गणना मशीन मानी जाती है। इसमें कई गोल पहिए लगे होते थे, जिन पर 0 से 9 तक अंक लिखे होते थे। इन पहियों को घुमाकर जोड़ और घटाना किया जाता था। यह आधुनिक कैलकुलेटर की दिशा में एक महत्वपूर्ण आविष्कार था।

इसके बाद जर्मनी के वैज्ञानिक गॉटफ्राइड लीबनिट्ज़ ने एक उन्नत कैलकुलेटर बनाया, जिसे लीबनिट्ज़ कैलकुलेटर कहा गया। यह मशीन जोड़, घटाना, गुणा और भाग सभी कार्य कर सकती थी। इस प्रकार गणना मशीनों में धीरे-धीरे सुधार होता गया।

 

1822 में ब्रिटेन के चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंस इंजन (Difference Engine) का आविष्कार किया।

 

 

 

यह भाप से चलने वाली एक मशीन थी, जो जोड़, घटाना, गुणा और भाग जैसे कार्य करने में सक्षम थी। चार्ल्स बैबेज को कंप्यूटर का जनक (Father of Computer) भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने आधुनिक कंप्यूटर की कल्पना सबसे पहले की थी। उनका Analytical Engine आधुनिक कंप्यूटर की मूल संरचना का आधार बना।

1930 के दशक में मार्क-1 नामक विद्युत-यांत्रिक गणना मशीन का निर्माण हुआ। यह विश्व की पहली पूर्ण स्वचालित गणना मशीन मानी जाती है। यह बड़ी मशीन थी, जिसका उपयोग जटिल गणनाएँ करने के लिए किया जाता था।

 

1946 में ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Computer) नामक पहला पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर बनाया गया।

 

 

 

इसका निर्माण जे. पी. एकर्ट और जॉन मौचली ने किया था। यह कंप्यूटर बहुत बड़ा था और इसमें हजारों वैक्यूम ट्यूब लगी हुई थीं। इसका उपयोग मुख्य रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना की सहायता के लिए किया गया।

1949 में EDSAC (Electronic Delay Storage Automatic Calculator) नामक पहला प्रोग्राम-संग्रहित (Stored Program) कंप्यूटर बनाया गया। इसमें प्रोग्राम को मेमोरी में संग्रहित किया जा सकता था, जो आधुनिक कंप्यूटर की दिशा में एक बड़ा कदम था।

1950 में EDVAC (Electronic Discrete Variable Automatic Computer) का निर्माण किया गया, जिसने कंप्यूटर की संरचना को और अधिक विकसित किया।

1951 में UNIVAC (Universal Automatic Computer) बनाया गया, जो सामान्य उपयोग के लिए तैयार किया गया पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था। इसका उपयोग सांख्यिकी और व्यावसायिक कार्यों के लिए किया गया।

 

 

 

इस प्रकार, अबेकस से शुरू हुई यह यात्रा धीरे-धीरे यांत्रिक मशीनों से इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर तक पहुँची। प्रारंभ में कंप्यूटर बहुत बड़े और धीमे थे, लेकिन आज वे छोटे, तेज और अत्यंत शक्तिशाली बन चुके हैं। यही कंप्यूटर विकास का इतिहास है, जिसने मानव जीवन को पूरी तरह बदल दिया।

 

कंप्यूटर की पीढ़ियाँ (Generations of Computer)

कंप्यूटर के विकास को समझने के लिए उसे विभिन्न पीढ़ियों (Generations) में बाँटा गया है। प्रत्येक पीढ़ी में तकनीक में सुधार हुआ, आकार छोटा हुआ, गति बढ़ी और कार्यक्षमता बेहतर होती गई। कंप्यूटर की पीढ़ियों को मुख्य रूप से पाँच भागों में विभाजित किया जाता है।


प्रथम पीढ़ी (First Generation) 1940 से 1956

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरों में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tubes) का उपयोग किया जाता था। ये कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े होते थे और एक पूरा कमरा घेर लेते थे। इनमें बिजली की खपत बहुत अधिक होती थी तथा ये बहुत गर्मी उत्पन्न करते थे। इन्हें ठंडा रखने के लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ती थी।

इन कंप्यूटरों में मशीन भाषा (Machine Language) का प्रयोग किया जाता था, जिसे समझना कठिन था। इनकी गति आज के कंप्यूटरों की तुलना में बहुत कम थी, लेकिन उस समय के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि थी। उदाहरण के रूप में ENIAC और UNIVAC प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर थे।

 

द्वितीय पीढ़ी (Second Generation) 1956 से 1963

द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटरों में वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांजिस्टर (Transistor) का उपयोग किया गया। ट्रांजिस्टर आकार में छोटे, अधिक टिकाऊ और कम बिजली खर्च करने वाले होते थे। इससे कंप्यूटर का आकार छोटा हुआ और उनकी गति भी बढ़ी।

इस पीढ़ी में असेंबली भाषा (Assembly Language) का उपयोग शुरू हुआ, जिससे प्रोग्रामिंग कुछ आसान हो गई। कंप्यूटर अधिक विश्वसनीय बने और गर्मी भी कम उत्पन्न करने लगे।

 

तृतीय पीढ़ी (Third Generation) 1964 से 1971

तृतीय पीढ़ी में ट्रांजिस्टर की जगह इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit IC) का उपयोग किया गया। एक छोटे चिप में कई ट्रांजिस्टर लगाए गए, जिससे कंप्यूटर और अधिक छोटे, तेज और शक्तिशाली बन गए।

इस पीढ़ी में कीबोर्ड और मॉनिटर का उपयोग शुरू हुआ। ऑपरेटिंग सिस्टम का विकास हुआ, जिससे एक समय में कई कार्य किए जा सकते थे। कंप्यूटर का उपयोग व्यापार, शिक्षा और सरकारी कार्यों में तेजी से बढ़ने लगा।

 

चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation) 1971 से वर्तमान तक

चतुर्थ पीढ़ी में माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) का उपयोग शुरू हुआ। हजारों और लाखों ट्रांजिस्टर एक छोटे चिप में समाहित कर दिए गए। इससे पर्सनल कंप्यूटर (PC) का विकास हुआ।

इस पीढ़ी के कंप्यूटर आकार में छोटे, गति में तेज और उपयोग में सरल हो गए। आज जो हम डेस्कटॉप, लैपटॉप, टैबलेट आदि का उपयोग करते हैं, वे इसी पीढ़ी के कंप्यूटर हैं। इंटरनेट और नेटवर्किंग का विकास भी इसी काल में हुआ।

 

पंचम पीढ़ी (Fifth Generation) वर्तमान और भविष्य

पंचम पीढ़ी के कंप्यूटरों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence AI) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ये कंप्यूटर मानव की तरह सोचने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित कर रहे हैं।

इस पीढ़ी में रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग, वॉयस रिकग्निशन, फेस रिकग्निशन जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। आज के स्मार्टफोन, स्मार्ट असिस्टेंट और आधुनिक सुपर कंप्यूटर इसी दिशा में विकसित हो रहे हैं।


इस प्रकार कंप्यूटर की प्रत्येक पीढ़ी में तकनीकी सुधार हुआ है। पहले जो कंप्यूटर एक पूरे कमरे के बराबर होते थे, आज वे हमारी हथेली में आ गए हैं। यह विकास मानव बुद्धि और विज्ञान की निरंतर प्रगति का परिणाम है।

कंप्यूटर के प्रकार (Types of Computer)

कंप्यूटर को उनके कार्य करने की विधि, आकार, क्षमता और उपयोग के आधार पर विभिन्न प्रकारों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक प्रकार का कंप्यूटर अलग-अलग उद्देश्य के लिए बनाया गया है। कंप्यूटर के प्रकारों को मुख्य रूप से तीन आधारों पर समझा जाता है कार्य प्रणाली के आधार पर, आकार के आधार पर और उपयोग के आधार पर।

सबसे पहले कार्य प्रणाली के आधार पर कंप्यूटर तीन प्रकार के होते हैं एनालॉग कंप्यूटर, डिजिटल कंप्यूटर और हाइब्रिड कंप्यूटर। एनालॉग कंप्यूटर वे होते हैं जो निरंतर बदलने वाले मान (Continuous Data) पर कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए तापमान मापने वाली मशीन या स्पीडोमीटर। ये कंप्यूटर सटीक संख्या के बजाय अनुमानित परिणाम देते हैं।

डिजिटल कंप्यूटर सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले कंप्यूटर हैं। ये 0 और 1 के रूप में डेटा पर कार्य करते हैं। डेस्कटॉप, लैपटॉप, टैबलेट और स्मार्टफोन डिजिटल कंप्यूटर के उदाहरण हैं। ये गणना, लेखन, डिजाइन, इंटरनेट और अनेक कार्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं।

हाइब्रिड कंप्यूटर में एनालॉग और डिजिटल दोनों की विशेषताएँ होती हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से चिकित्सा और वैज्ञानिक क्षेत्रों में किया जाता है, जहाँ सटीक और तेज परिणाम आवश्यक होते हैं।

अब आकार के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार समझते हैं। आकार और क्षमता के अनुसार कंप्यूटर चार प्रकार के होते हैं सुपर कंप्यूटर, मेनफ्रेम कंप्यूटर, मिनी कंप्यूटर और माइक्रो कंप्यूटर।

सुपर कंप्यूटर दुनिया के सबसे तेज और शक्तिशाली कंप्यूटर होते हैं। इनका उपयोग मौसम पूर्वानुमान, अंतरिक्ष अनुसंधान और वैज्ञानिक शोध में किया जाता है। ये अत्यंत महंगे और बड़े होते हैं।

मेनफ्रेम कंप्यूटर बड़े संस्थानों, बैंकों और सरकारी विभागों में उपयोग किए जाते हैं। ये एक साथ हजारों उपयोगकर्ताओं का डेटा संभाल सकते हैं।

मिनी कंप्यूटर मध्यम स्तर के कंप्यूटर होते हैं, जिनका उपयोग छोटे उद्योगों और संस्थानों में किया जाता है।

माइक्रो कंप्यूटर सबसे छोटे और सामान्य उपयोग के कंप्यूटर होते हैं। डेस्कटॉप, लैपटॉप और पर्सनल कंप्यूटर इसी श्रेणी में आते हैं। आज अधिकांश लोग माइक्रो कंप्यूटर का ही उपयोग करते हैं।

उपयोग के आधार पर भी कंप्यूटर दो प्रकार के होते हैं सामान्य उद्देश्य (General Purpose) और विशेष उद्देश्य (Special Purpose)। सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर वे हैं जिनका उपयोग अनेक कार्यों के लिए किया जा सकता है, जैसे पर्सनल कंप्यूटर। विशेष उद्देश्य कंप्यूटर किसी एक विशेष कार्य के लिए बनाए जाते हैं, जैसे एटीएम मशीन या ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम।

इस प्रकार कंप्यूटर के विभिन्न प्रकार उनकी कार्यप्रणाली, आकार और उपयोग के अनुसार अलग-अलग होते हैं। प्रत्येक प्रकार का अपना विशेष महत्व है और आवश्यकता के अनुसार उनका उपयोग किया जाता है। आधुनिक समय में डिजिटल और माइक्रो कंप्यूटर का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है।

कंप्यूटर के प्रकार (Types of Computer)

कंप्यूटर को मुख्य रूप से तीन आधारों पर बाँटा जाता है

  1. कार्य प्रणाली के आधार पर
  2. आकार के आधार पर
  3. उपयोग के आधार पर

अब हम प्रत्येक प्रकार को सूची (List) के रूप में समझेंगे और नीचे यह भी जानेंगे कि वे कौन-कौन से कार्य करते हैं।

 

1. कार्य प्रणाली के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार

  1. एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computer)
  2. डिजिटल कंप्यूटर (Digital Computer)
  3. हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer)

अब इनके कार्य समझते हैं:

एनालॉग कंप्यूटर
तापमान, दबाव, गति जैसे निरंतर बदलने वाले मानों को मापता है।
वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग होता है।
अनुमानित (Approximate) परिणाम देता है।

डिजिटल कंप्यूटर
0 और 1 (Binary System) पर कार्य करता है।
गणना, लेखन, इंटरनेट, डिजाइन, अकाउंटिंग आदि कार्य करता है।
डेस्कटॉप, लैपटॉप, मोबाइल इसी प्रकार में आते हैं।

हाइब्रिड कंप्यूटर
एनालॉग और डिजिटल दोनों का मिश्रण होता है।
अस्पतालों में ECG, ICU मॉनिटरिंग में उपयोग होता है।
वैज्ञानिक शोध और विशेष प्रयोगों में प्रयोग किया जाता है।

 

2. आकार के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार

  1. सुपर कंप्यूटर (Super Computer)
  2. मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer)
  3. मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)
  4. माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)

अब इनके कार्य समझते हैं:

सुपर कंप्यूटर
मौसम पूर्वानुमान करता है।
अंतरिक्ष अनुसंधान में उपयोग होता है।
परमाणु परीक्षण और वैज्ञानिक शोध में काम आता है।
बहुत तेज और शक्तिशाली होता है।

मेनफ्रेम कंप्यूटर
बैंकिंग सिस्टम में उपयोग होता है।
बड़ी कंपनियों का डेटा संभालता है।
हजारों उपयोगकर्ताओं को एक साथ सेवा देता है।

मिनी कंप्यूटर
छोटे उद्योगों और संस्थानों में उपयोग होता है।
मध्यम स्तर के डेटा प्रोसेसिंग कार्य करता है।

माइक्रो कंप्यूटर
घर, स्कूल, ऑफिस में उपयोग होता है।
टाइपिंग, इंटरनेट, गेम, पढ़ाई, डिजाइन आदि कार्य करता है।
डेस्कटॉप और लैपटॉप इसी श्रेणी में आते हैं।

 

3. उपयोग के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार

  1. सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर (General Purpose Computer)
  2. विशेष उद्देश्य कंप्यूटर (Special Purpose Computer)

अब इनके कार्य समझते हैं:

सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर
एक साथ कई प्रकार के कार्य करता है।
पढ़ाई, टाइपिंग, इंटरनेट, प्रेजेंटेशन, अकाउंटिंग आदि में उपयोग होता है।

विशेष उद्देश्य कंप्यूटर
केवल एक विशेष कार्य के लिए बनाया जाता है।
एटीएम मशीन
ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम
मिसाइल कंट्रोल सिस्टम

इस प्रकार कंप्यूटर विभिन्न प्रकार के होते हैं और प्रत्येक का अपना अलग उद्देश्य और कार्यक्षेत्र होता है। आवश्यकता के अनुसार सही प्रकार का कंप्यूटर उपयोग किया जाता है।

 

आकार के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार

(Size Based Classification of Computers)

आकार, क्षमता और कार्यक्षमता के आधार पर कंप्यूटर मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं

  1. सुपर कंप्यूटर
  2. मेनफ्रेम कंप्यूटर
  3. मिनी कंप्यूटर
  4. माइक्रो कंप्यूटर

अब हम प्रत्येक प्रकार को विस्तार से समझते हैं।

 

1. सुपर कंप्यूटर (Super Computer)

सुपर कंप्यूटर दुनिया के सबसे तेज, शक्तिशाली और महंगे कंप्यूटर होते हैं। इनकी प्रोसेसिंग गति सामान्य कंप्यूटरों से हजारों गुना अधिक होती है। ये एक सेकंड में अरबों-खरबों गणनाएँ कर सकते हैं।

सुपर कंप्यूटर के कार्य:

मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecasting)
अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research)
परमाणु परीक्षण (Nuclear Research)
वैज्ञानिक गणनाएँ
भूकंप विश्लेषण
रक्षा अनुसंधान

ये कंप्यूटर बहुत बड़े होते हैं और विशेष कमरे में रखे जाते हैं जहाँ तापमान नियंत्रित रहता है।

 

2. मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer)

मेनफ्रेम कंप्यूटर बड़े संगठनों और संस्थानों में उपयोग किए जाते हैं। ये एक साथ हजारों उपयोगकर्ताओं का डेटा संभाल सकते हैं। इनकी स्टोरेज क्षमता और प्रोसेसिंग शक्ति बहुत अधिक होती है।

मेनफ्रेम कंप्यूटर के कार्य:

बैंकिंग सिस्टम संचालन
रेलवे आरक्षण प्रणाली
सरकारी रिकॉर्ड प्रबंधन
बड़ी कंपनियों का डेटा प्रबंधन
बीमा और वित्तीय सेवाएँ

ये सुपर कंप्यूटर से थोड़े कम शक्तिशाली होते हैं, लेकिन बड़े स्तर पर डेटा संभालने में सक्षम होते हैं।

 

3. मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)

मिनी कंप्यूटर मध्यम आकार के कंप्यूटर होते हैं। ये सुपर और मेनफ्रेम से छोटे होते हैं, लेकिन माइक्रो कंप्यूटर से अधिक शक्तिशाली होते हैं। पहले इनका उपयोग छोटे उद्योगों और कार्यालयों में किया जाता था।

मिनी कंप्यूटर के कार्य:

छोटे उद्योगों का डेटा प्रबंधन
फैक्ट्री नियंत्रण प्रणाली
मध्यम स्तर के सर्वर कार्य
संस्थानों में बहु-उपयोगकर्ता प्रणाली

आज के समय में इनका स्थान अधिकतर सर्वर सिस्टम ने ले लिया है।

 

4. माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)

माइक्रो कंप्यूटर सबसे सामान्य और सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले कंप्यूटर हैं। इन्हें पर्सनल कंप्यूटर (PC) भी कहा जाता है। ये आकार में छोटे, किफायती और उपयोग में सरल होते हैं।

माइक्रो कंप्यूटर के प्रकार:

डेस्कटॉप कंप्यूटर
लैपटॉप
टैबलेट
स्मार्टफोन

माइक्रो कंप्यूटर के कार्य:

टाइपिंग और डॉक्यूमेंट बनाना
इंटरनेट चलाना
ऑनलाइन पढ़ाई
अकाउंटिंग कार्य
गेम खेलना
प्रेजेंटेशन बनाना
डिजाइनिंग और प्रोग्रामिंग

आज घर, स्कूल, कॉलेज और ऑफिस में सबसे अधिक माइक्रो कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है।

निष्कर्ष:

सुपर कंप्यूटर सबसे शक्तिशाली होते हैं, मेनफ्रेम बड़े संगठनों के लिए उपयोगी होते हैं, मिनी कंप्यूटर मध्यम स्तर के कार्यों के लिए होते हैं और माइक्रो कंप्यूटर सामान्य उपयोग के लिए बनाए जाते हैं। आवश्यकता और कार्य के अनुसार अलग-अलग प्रकार के कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है।

 

 

 

कंप्यूटर के डिवाइस (Computer Devices)

कंप्यूटर एक अकेली मशीन नहीं है, बल्कि यह कई उपकरणों (Devices) से मिलकर बना होता है। ये सभी डिवाइस मिलकर कंप्यूटर को सही ढंग से कार्य करने में सहायता करते हैं। जब हम कंप्यूटर पर कोई काम करते हैं, तो वास्तव में इनपुट डिवाइस, प्रोसेसिंग यूनिट (CPU), आउटपुट डिवाइस और स्टोरेज डिवाइस मिलकर एक पूरी प्रक्रिया को पूरा करते हैं। इस प्रक्रिया को Input Process Output Cycle कहा जाता है।

कंप्यूटर के डिवाइस मुख्य रूप से चार भागों में विभाजित किए जाते हैं

  1. इनपुट डिवाइस
  2. आउटपुट डिवाइस
  3. स्टोरेज डिवाइस
  4. प्रोसेसिंग डिवाइस (CPU)

अब हम इन सभी को विस्तार से समझते हैं।

 

1. इनपुट डिवाइस (Input Devices)

इनपुट डिवाइस वे उपकरण होते हैं जिनकी सहायता से हम कंप्यूटर को डेटा, सूचना या निर्देश देते हैं। यदि हम कंप्यूटर को कोई निर्देश नहीं देंगे, तो वह कोई कार्य नहीं कर सकता। इसलिए इनपुट डिवाइस कंप्यूटर का प्रारंभिक भाग हैं।

इनपुट डिवाइस का मुख्य कार्य:

डेटा को डिजिटल रूप में बदलना
उपयोगकर्ता के निर्देश को कंप्यूटर तक पहुँचाना
टेक्स्ट, चित्र, आवाज या संकेत को स्वीकार करना

इनपुट डिवाइस के उदाहरण

Keyboard
Mouse
Scanner
Microphone
Webcam
Joystick
Light Pen
Touch Screen
Trackball
Barcode Reader
QR Code Scanner
Biometric Scanner
Fingerprint Scanner
Retina Scanner
OMR (Optical Mark Reader)
OCR (Optical Character Reader)
MICR (Magnetic Ink Character Reader)
Graphics Tablet
Digital Pen
Gamepad
Steering Wheel Controller
Touchpad
Smart Card Reader
Magnetic Card Reader
MIDI Keyboard
Voice Recognition Device
Remote Control
Motion Sensor
Camera
Infrared Sensor
GPS Receiver
Digital Signature Pad

उदाहरण से समझें

यदि आप कीबोर्ड से 100 + 50 टाइप करते हैं, तो यह इनपुट है।
यदि आप माइक्रोफोन में बोलकर Open File कहते हैं, तो वह भी इनपुट है।
यदि आप फिंगरप्रिंट लगाकर उपस्थिति दर्ज करते हैं, तो वह बायोमेट्रिक इनपुट है।

 

2. आउटपुट डिवाइस (Output Devices)

आउटपुट डिवाइस वे उपकरण होते हैं जो कंप्यूटर द्वारा प्रोसेस किए गए डेटा को परिणाम के रूप में प्रदर्शित करते हैं। इनपुट देने के बाद जो परिणाम हमें दिखाई देता है या सुनाई देता है, वही आउटपुट है।

आउटपुट डिवाइस का मुख्य कार्य:

स्क्रीन पर परिणाम दिखाना
कागज़ पर प्रिंट देना
आवाज उत्पन्न करना
दृश्य प्रस्तुति करना

आउटपुट डिवाइस के उदाहरण

Monitor
Printer
Speaker
Headphone
Projector
Plotter
LCD Screen
LED Screen
OLED Display
Smart TV
VR Headset
AR Glasses
3D Printer
Braille Display
Braille Printer
Sound Card Output
GPS Display Unit
Digital Billboard
ATM Display
Fax Machine
Smartwatch Screen
Car Dashboard Display
E-Book Reader
Medical Monitor Screen
Home Theater System
Bluetooth Speaker
Large Display Panel
Interactive Whiteboard
Digital Clock Display
Traffic Signal Display
Electronic Notice Board
LED Matrix Board

उदाहरण से समझें

यदि आपने 100 + 50 टाइप किया और स्क्रीन पर 150 दिखाई दिया, तो मॉनिटर आउटपुट दे रहा है।
यदि आपने डॉक्यूमेंट प्रिंट किया, तो प्रिंटर आउटपुट दे रहा है।
यदि गाना बजा और आवाज सुनाई दी, तो स्पीकर आउटपुट दे रहा है।

 

3. स्टोरेज डिवाइस (Storage Devices)

स्टोरेज डिवाइस वे उपकरण होते हैं जिनमें डेटा को सुरक्षित रखा जाता है ताकि भविष्य में उसका उपयोग किया जा सके। कंप्यूटर में कार्य करते समय डेटा को सेव करना आवश्यक होता है।

स्टोरेज डिवाइस दो प्रकार के होते हैं:

प्राथमिक स्टोरेज
RAM
ROM

द्वितीयक स्टोरेज
Hard Disk
SSD
Pen Drive
Memory Card
CD
DVD
External Hard Disk

उदाहरण

यदि आप MS Word में फाइल बनाकर सेव करते हैं, तो वह हार्ड डिस्क में स्टोर होती है।
यदि आप फाइल को पेन ड्राइव में कॉपी करते हैं, तो वह पोर्टेबल स्टोरेज है।

 

4. प्रोसेसिंग डिवाइस (CPU)

CPU (Central Processing Unit) कंप्यूटर का मस्तिष्क है। यह इनपुट को प्रोसेस करता है और आउटपुट तैयार करता है। CPU के बिना कंप्यूटर कार्य नहीं कर सकता।

CPU के मुख्य भाग:

ALU गणना करता है
CU
नियंत्रण करता है
Registers
अस्थायी डेटा स्टोर करते हैं

 

इनपुट, प्रोसेस और आउटपुट का पूरा उदाहरण

मान लीजिए आपने फोटो स्कैन किया।

स्कैनर से फोटो डाला इनपुट
CPU
ने फोटो प्रोसेस की प्रोसेस
स्क्रीन पर फोटो दिखी आउटपुट
फोटो हार्ड डिस्क में सेव हुई स्टोरेज

 

सारांश

इनपुट डिवाइस जानकारी अंदर भेजते हैं।
CPU
जानकारी पर कार्य करता है।
आउटपुट डिवाइस परिणाम दिखाते हैं।
स्टोरेज डिवाइस डेटा सुरक्षित रखते हैं।

इन सभी डिवाइस के सहयोग से ही कंप्यूटर सही तरीके से कार्य करता है।

 

 

कंप्यूटर के भाग

कीबोर्ड (Keyboard)

कंप्यूटर के मुख्य भागों में कीबोर्ड एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण है। कीबोर्ड एक इनपुट डिवाइस (Input Device) है, जिसका उपयोग कंप्यूटर को अक्षरों, अंकों, चिन्हों तथा विभिन्न निर्देशों के रूप में डेटा देने के लिए किया जाता है। जब भी हम कंप्यूटर में कुछ टाइप करते हैं, कोई कमांड देते हैं या कोई शॉर्टकट उपयोग करते हैं, तो वह कार्य कीबोर्ड के माध्यम से ही किया जाता है।

सामान्यतः एक स्टैंडर्ड कीबोर्ड में लगभग 101, 104 या 108 कुंजियाँ (Keys) होती हैं। हालांकि कुंजियों की संख्या कीबोर्ड के प्रकार, मॉडल और कंपनी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

कीबोर्ड कैसे कार्य करता है?

जब उपयोगकर्ता कीबोर्ड पर कोई कुंजी दबाता है, तो वह संकेत (Signal) पहले कीबोर्ड के अंदर स्थित बफर (Buffer) में जाता है। इसके बाद वह कोड CPU को भेजा जाता है। CPU उस कोड को प्रोसेस करता है और परिणाम मॉनिटर पर प्रदर्शित होता है। इस प्रकार कीबोर्ड, CPU और मॉनिटर मिलकर इनपुट और आउटपुट की प्रक्रिया को पूरा करते हैं।

उदाहरण:
यदि आप कीबोर्ड से A दबाते हैं, तो वह अक्षर स्क्रीन पर दिखाई देता है।
यदि आप 5 + 5 टाइप करके Enter दबाते हैं, तो परिणाम स्क्रीन पर प्रदर्शित होता है।

 

कीबोर्ड की कुंजियों के प्रकार

कीबोर्ड की कुंजियों को उनके कार्य के आधार पर कई भागों में बाँटा जाता है।

1. अल्फान्यूमेरिक कुंजियाँ (Alphanumeric Keys)

इनमें A से Z तक के अक्षर, a से z तक के छोटे अक्षर तथा 0 से 9 तक के अंक शामिल होते हैं। इनका उपयोग टाइपिंग और संख्या दर्ज करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:
A, B, C… Z
a, b, c… z
0, 1, 2… 9

यदि आप अपना नाम टाइप करते हैं, तो आप अल्फान्यूमेरिक कुंजियों का उपयोग कर रहे होते हैं।

 

2. न्यूमेरिक कीपैड (Numeric Keypad)

कीबोर्ड के दाईं ओर स्थित नंबर पैड को न्यूमेरिक कीपैड कहा जाता है। इसमें 0 से 9 तक के अंक और गणितीय चिन्ह (+, , ×, ÷) होते हैं। इसका उपयोग विशेष रूप से अकाउंटिंग और तेज गणना के लिए किया जाता है।

 

3. कर्सर कंट्रोल कुंजियाँ (Cursor Control Keys)

इनमें चार तीर वाली कुंजियाँ होती हैं Up, Down, Left और Right। इनकी सहायता से कर्सर को स्क्रीन पर किसी भी दिशा में ले जाया जा सकता है।

 

4. विशेष कुंजियाँ (Special Keys)

Page Up (PgUp)

डॉक्यूमेंट में एक पेज ऊपर जाने के लिए उपयोग होती है।

Page Down (PgDn)

डॉक्यूमेंट में एक पेज नीचे जाने के लिए उपयोग होती है।

Ctrl (Control Key)

यह कुंजी अकेले उपयोग नहीं होती, बल्कि अन्य कुंजियों के साथ मिलकर विशेष कार्य करती है।
उदाहरण:
Ctrl + A =
सभी चयन
Ctrl + S =
सेव
Ctrl + C =
कॉपी
Ctrl + V =
पेस्ट

Shift Key

बड़े अक्षर लिखने या ऊपर वाले चिन्ह टाइप करने के लिए उपयोग होती है।
उदाहरण: Shift + 1 = !

Esc (Escape Key)

खुले हुए मेनू या प्रोग्राम से बाहर निकलने के लिए उपयोग होती है।

Delete Key

फाइल या टेक्स्ट हटाने के लिए उपयोग होती है।
Shift + Delete =
स्थायी रूप से हटाना।

Backspace Key

दाएँ से बाएँ अक्षर मिटाने के लिए उपयोग होती है।

Spacebar

दो शब्दों के बीच खाली स्थान देने के लिए उपयोग होती है। यह कीबोर्ड की सबसे लंबी कुंजी है।

Num Lock

न्यूमेरिक कीपैड को चालू और बंद करने के लिए उपयोग होती है।

Windows Key

Start Menu खोलने के लिए उपयोग होती है।

Tab Key

कर्सर को आगे बढ़ाने या एक विकल्प से दूसरे विकल्प पर जाने के लिए उपयोग होती है।

Enter Key

नई लाइन शुरू करने या कमांड स्वीकार करने के लिए उपयोग होती है।

Caps Lock

सभी अक्षरों को बड़े (Capital) या छोटे (Small) रूप में टाइप करने के लिए उपयोग होती है।

Print Screen (PrtSc)

स्क्रीनशॉट लेने के लिए उपयोग होती है। बाद में Ctrl + V से पेस्ट किया जा सकता है।

 

Function Keys (F1 से F12)

कीबोर्ड के सबसे ऊपर F1 से F12 तक की कुंजियाँ होती हैं। इनका उपयोग विशेष कार्यों के लिए किया जाता है।

F1 Help खोलने के लिए
F2
फाइल या फोल्डर का नाम बदलने के लिए
F3
सर्च करने के लिए
F4
Alt + F4 से विंडो बंद
F5
Refresh करने के लिए
F6
ब्राउज़र में URL बार पर जाने के लिए
F7
Spelling Check
F8
Safe Mode में जाने के लिए
F9
विशेष सॉफ्टवेयर कार्य
F10
Shift + F10 = Right Click Menu
F11
Full Screen Mode
F12
Save As (Microsoft Word में)

 

 

माउस (Mouse)

माउस कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण इनपुट डिवाइस है। इसका उपयोग स्क्रीन पर दिखाई देने वाले कर्सर (Pointer) को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। माउस की सहायता से हम फाइल खोलते हैं, प्रोग्राम चलाते हैं, टेक्स्ट चुनते हैं, ड्रैग-ड्रॉप करते हैं और विभिन्न कमांड देते हैं। आज के समय में माउस कंप्यूटर संचालन का एक आवश्यक साधन है।

माउस का आविष्कार किसने, कब और कहाँ?

माउस का आविष्कार डगलस एंगेलबार्ट (Douglas Engelbart) ने किया था।
उन्होंने इसे 1964 में अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया स्थित Stanford Research Institute (SRI) में विकसित किया।

पहला माउस लकड़ी का बना था और उसमें नीचे की ओर दो पहिए लगे होते थे। 1968 में डगलस एंगेलबार्ट ने सार्वजनिक रूप से इसका प्रदर्शन किया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को Mother of All Demos कहा जाता है।

बाद में 1970 में माउस का पेटेंट भी कराया गया।

माउस का नाम Mouse क्यों पड़ा?

इस डिवाइस के पीछे एक तार (Wire) लगा होता था, जो चूहे की पूँछ जैसा दिखाई देता था। इसलिए इसका नाम Mouse रखा गया।

 

माउस कैसे काम करता है?

जब हम माउस को मेज पर आगे-पीछे या दाएँ-बाएँ घुमाते हैं, तो उसके अंदर लगा सेंसर उस गति को पहचानता है। यह गति इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल में बदलकर कंप्यूटर को भेजी जाती है। फिर स्क्रीन पर कर्सर उसी दिशा में चलता है।

जब हम माउस का बटन दबाते हैं, तो वह एक कमांड CPU को भेजता है और CPU उस कमांड को प्रोसेस करता है।

उदाहरण:
यदि आप किसी फाइल पर डबल क्लिक करते हैं, तो वह फाइल खुल जाती है।
यदि आप किसी टेक्स्ट को ड्रैग करते हैं, तो वह चयन (Select) हो जाता है।

 

माउस के मुख्य भाग

  1. लेफ्ट बटन
  2. राइट बटन
  3. स्क्रोल व्हील
  4. ऑप्टिकल सेंसर
  5. केबल या वायरलेस रिसीवर

 

माउस के प्रकार

  1. मैकेनिकल माउस
    इसमें नीचे रबर की बॉल होती थी। जब माउस हिलाया जाता था, तो बॉल घूमती थी और कर्सर चलता था। आजकल इसका उपयोग लगभग बंद हो चुका है।
  2. ऑप्टिकल माउस
    इसमें LED या लेजर सेंसर होता है। यह प्रकाश की सहायता से गति पहचानता है। आज सबसे अधिक यही उपयोग होता है।
  3. लेजर माउस
    यह ऑप्टिकल माउस का उन्नत रूप है। इसमें लेजर तकनीक होती है, जो अधिक सटीकता देती है।
  4. वायरलेस माउस
    इसमें कोई तार नहीं होता। यह USB रिसीवर या ब्लूटूथ से जुड़ता है।
  5. ब्लूटूथ माउस
    यह सीधे ब्लूटूथ के माध्यम से कंप्यूटर से जुड़ता है।
  6. गेमिंग माउस
    विशेष रूप से गेम खेलने के लिए बनाया गया माउस। इसमें अतिरिक्त बटन और अधिक DPI होता है।
  7. ट्रैकबॉल माउस
    इसमें ऊपर की ओर एक बॉल होती है जिसे हाथ से घुमाया जाता है।

 

माउस से किए जाने वाले कार्य

फाइल खोलना
टेक्स्ट चयन करना
ड्रैग और ड्रॉप करना
चित्र बनाना
वेब पेज स्क्रोल करना
मेनू खोलना
गेम खेलना
डिजाइनिंग करना

 

माउस क्लिक के प्रकार

  1. सिंगल क्लिक किसी फाइल या आइकन को चुनने के लिए
  2. डबल क्लिक फाइल खोलने के लिए
  3. राइट क्लिक शॉर्टकट मेनू खोलने के लिए
  4. ड्रैग और ड्रॉप फाइल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए

 

DPI क्या होता है?

DPI का अर्थ है Dots Per Inch। यह माउस की संवेदनशीलता को दर्शाता है। DPI जितना अधिक होगा, कर्सर उतना तेज़ चलेगा। गेमिंग माउस में अधिक DPI होता है।

 

माउस के फायदे

कंप्यूटर संचालन आसान बनाता है
कार्य तेजी से होता है
ग्राफिक्स और डिजाइन में सहायक
उपयोग में सरल

 

माउस की सीमाएँ

समतल सतह की आवश्यकता
वायर वाले माउस में तार की समस्या
बहुत अधिक उपयोग से हाथ में दर्द (Mouse Strain)

 

आधुनिक समय में माउस का महत्व

आज के समय में ग्राफिक डिजाइन, वीडियो एडिटिंग, गेमिंग, ऑफिस कार्य और इंटरनेट उपयोग में माउस का विशेष महत्व है। हालांकि टच स्क्रीन डिवाइस आ गए हैं, फिर भी डेस्कटॉप कंप्यूटर में माउस का महत्व कम नहीं हुआ है।

 

मॉनिटर (Monitor) क्या है एवं उसके प्रकार

मॉनिटर कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण आउटपुट डिवाइस (Output Device) है। इसका उपयोग कंप्यूटर द्वारा प्रोसेस किए गए परिणाम को स्क्रीन पर दिखाने के लिए किया जाता है। मॉनिटर को VDU (Visual Display Unit) भी कहा जाता है। जब हम कंप्यूटर पर कोई काम करते हैं जैसे टाइपिंग, फोटो देखना, वीडियो चलाना या इंटरनेट ब्राउज़ करना तो उसका परिणाम मॉनिटर पर सॉफ्ट कॉपी (Soft Copy) के रूप में दिखाई देता है।

मॉनिटर यह नहीं तय करता कि स्क्रीन पर क्या दिखेगा। स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी उस सॉफ्टवेयर, प्रोग्राम या एप्लिकेशन पर निर्भर करती है जिसका हम उपयोग कर रहे होते हैं।

उदाहरण:
यदि आप MS Word खोलते हैं, तो टाइप किया हुआ टेक्स्ट दिखाई देगा।
यदि आप कोई फिल्म चलाते हैं, तो वीडियो दिखाई देगा।
यदि आप गेम खेलते हैं, तो गेम का दृश्य दिखाई देगा।

 

मॉनिटर के प्रकार

समय के साथ तकनीक में बदलाव आया और मॉनिटर भी विकसित होते गए। मुख्य रूप से मॉनिटर के निम्न प्रकार हैं:

1. CRT मॉनिटर (Cathode Ray Tube)

 

 

 

CRT मॉनिटर पुराने समय में सबसे अधिक उपयोग किया जाता था। यह आकार में बड़ा और भारी होता था। इसका पीछे का भाग मोटा और बॉक्स जैसा होता था। इसमें कैथोड रे ट्यूब तकनीक का उपयोग किया जाता था।

विशेषताएँ:
आकार में बड़ा और भारी
अधिक बिजली की खपत
अधिक गर्मी उत्पन्न करता था
आज लगभग उपयोग में नहीं

 

2. LCD मॉनिटर (Liquid Crystal Display)

 

 

 

LCD मॉनिटर CRT के बाद आया। यह आकार में पतला और हल्का होता है। इसमें लिक्विड क्रिस्टल तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह कम बिजली की खपत करता है और कम जगह घेरता है।

विशेषताएँ:
हल्का और पतला
कम बिजली खर्च
बेहतर स्क्रीन क्वालिटी
CRT से महँगा

 

3. LED मॉनिटर (Light Emitting Diode)

 

 

 

LED मॉनिटर आधुनिक समय में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला मॉनिटर है। यह LCD का उन्नत रूप है। इसमें बैकलाइट के लिए LED तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे स्क्रीन अधिक चमकदार और स्पष्ट दिखाई देती है।

विशेषताएँ:
बहुत पतला और हल्का
कम बिजली खपत
उच्च गुणवत्ता की तस्वीर
अधिक टिकाऊ

 

4. OLED मॉनिटर (Organic Light Emitting Diode)

 

 

 

OLED मॉनिटर नई और उन्नत तकनीक है। इसमें प्रत्येक पिक्सेल स्वयं प्रकाश उत्पन्न करता है, जिससे चित्र की गुणवत्ता बहुत उच्च होती है।

विशेषताएँ:
बेहतरीन रंग और कॉन्ट्रास्ट
बहुत पतला
महँगा

 

मॉनिटर के मुख्य भाग

स्क्रीन (Display Panel)
पावर बटन
ब्राइटनेस और कंट्रोल बटन
स्टैंड
केबल पोर्ट (HDMI, VGA आदि)

 

मॉनिटर का कार्य

टेक्स्ट दिखाना
चित्र और वीडियो दिखाना
गेम प्रदर्शित करना
ग्राफिक्स और डिजाइन कार्य में सहायता
ऑनलाइन क्लास और मीटिंग दिखाना

 

मॉनिटर के फायदे

तुरंत परिणाम दिखाता है
उपयोग में सरल
शिक्षा, व्यापार और मनोरंजन में उपयोगी

 

 

 

 

स्कैनर (Scanner) क्या होता है?

स्कैनर एक इनपुट डिवाइस (Input Device) है जिसका उपयोग किसी चित्र, दस्तावेज़ या लिखित सामग्री को डिजिटल रूप में बदलने के लिए किया जाता है। जब हम किसी कागज़, फोटो या पुस्तक को स्कैन करते हैं, तो वह कंप्यूटर में उसी रूप में सुरक्षित हो जाती है।

सरल शब्दों में
स्कैनर कागज़ पर छपी जानकारी को कंप्यूटर में कॉपी कर देता है।

स्कैनर प्रकाश (Light) या लेजर किरणों की सहायता से दस्तावेज़ को पढ़ता है और उसे डिजिटल सिग्नल में बदल देता है। स्कैन किया गया डेटा मॉनिटर पर दिखाई देता है और उसे बाद में एडिट, सेव या प्रिंट किया जा सकता है।

उदाहरण:
किसी प्रमाणपत्र को स्कैन करके ईमेल करना
फोटो को स्कैन करके फोटोशॉप में एडिट करना

स्कैनर के प्रकार

1. फ्लैटबेड स्कैनर (Flatbed Scanner)

सबसे अधिक उपयोग होने वाला स्कैनर। इसमें दस्तावेज़ को कांच की सतह पर रखा जाता है।
यह पुस्तक, प्रमाणपत्र और फोटो स्कैन करने के लिए उपयुक्त है।

2. शीट-फेड स्कैनर (Sheet-fed Scanner)

इसमें दस्तावेज़ अंदर डाला जाता है और मशीन उसे खींचकर स्कैन करती है।
एक साथ कई पन्ने स्कैन कर सकता है, लेकिन मोटी किताब स्कैन नहीं कर सकता।

3. हैंड-हेल्ड स्कैनर (Handheld Scanner)

इसे हाथ से चलाया जाता है। छोटे टेक्स्ट या छोटे भाग स्कैन करने के लिए उपयोग होता है।

4. ड्रम स्कैनर (Drum Scanner)

उच्च गुणवत्ता की छपाई और प्रकाशन कार्यों में उपयोग किया जाता है।
बहुत उच्च रेजोल्यूशन देता है।

5. विशेष स्कैनर

OMR Scanner परीक्षा की OMR शीट जांचने के लिए
Barcode Scanner बारकोड पढ़ने के लिए
Medical Scanner अस्पताल में उपयोग

 

प्रिंटर (Printer) क्या होता है?

प्रिंटर एक आउटपुट डिवाइस है जो कंप्यूटर के सॉफ्ट डेटा को कागज़ पर हार्ड कॉपी में बदल देता है।

उदाहरण:
रिजल्ट प्रिंट करना
फोटो प्रिंट करना
बिल प्रिंट करना

प्रिंटर के प्रकार

प्रिंटर दो मुख्य श्रेणियों में बाँटे जाते हैं:

1. Impact Printer

यह प्रिंटर कागज़ पर सीधे प्रहार करके अक्षर छापता है।
इसमें आवाज़ अधिक होती है और गुणवत्ता कम होती है।

प्रकार:
Dot Matrix Printer
Line Printer
Drum Printer

2. Non-Impact Printer

यह बिना प्रहार के स्याही या लेजर तकनीक से छपाई करता है।
गुणवत्ता बेहतर और आवाज कम।

प्रकार:

Inkjet Printer

कार्ट्रिज में भरी स्याही से छपाई करता है।
घरेलू उपयोग के लिए उपयुक्त।

Laser Printer

लेजर और टोनर का उपयोग करता है।
तेज गति और उच्च गुणवत्ता देता है।

Thermal Printer

गर्मी से छपाई करता है।
बिल मशीनों में उपयोग होता है।

 

स्पीकर (Speaker)

स्पीकर एक आउटपुट डिवाइस है जो कंप्यूटर की ध्वनि (Sound) सुनने के लिए उपयोग होता है।
गाना, वीडियो या अलर्ट साउंड सुनने के लिए इसे CPU से जोड़ा जाता है।

हेडफोन (Headphone)

हेडफोन भी एक आउटपुट डिवाइस है।
इसमें बाएँ और दाएँ छोटे स्पीकर होते हैं जिन्हें कान में लगाकर निजी रूप से ध्वनि सुनी जाती है।

 

UPS क्या होता है?

UPS का पूरा नाम Uninterruptible Power Supply है।
यह बिजली चले जाने पर कुछ समय तक कंप्यूटर को बिजली देता है ताकि डेटा सुरक्षित रूप से सेव किया जा सके।

यदि UPS न हो तो अचानक बिजली जाने पर डेटा नष्ट हो सकता है।

 

CPU (Central Processing Unit)

CPU को कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है।
यह सभी निर्देशों को प्रोसेस करता है।

जब हम कोई इनपुट देते हैं, तो CPU उसे समझता है, प्रोसेस करता है और आउटपुट देता है।

CPU के अंदर मुख्य भाग:

Processor
RAM
ROM
Motherboard
Hard Disk
SMPS

 

मेमोरी (Memory)

मेमोरी वह स्थान है जहाँ डेटा और प्रोग्राम संग्रहित होते हैं।

मेमोरी की इकाइयाँ

8 बिट = 1 बाइट
1024
बाइट = 1 KB
1024 KB = 1 MB
1024 MB = 1 GB
1024 GB = 1 TB

मेमोरी के प्रकार

1. प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory)

यह अस्थायी मेमोरी होती है।

RAM (Random Access Memory)

अस्थायी मेमोरी।
कंप्यूटर बंद होते ही डेटा मिट जाता है।

ROM (Read Only Memory)

स्थायी मेमोरी।
कंप्यूटर बंद होने पर भी डेटा सुरक्षित रहता है।

2. द्वितीयक मेमोरी (Secondary Memory)

यह स्थायी स्टोरेज होती है।

उदाहरण:
Hard Disk
SSD
CD
DVD
Pen Drive

 

हार्डवेयर (Hardware)

जिसे हम देख और छू सकते हैं उसे हार्डवेयर कहते हैं।

उदाहरण:
कीबोर्ड
माउस
मॉनिटर
CPU
प्रिंटर

 

सॉफ्टवेयर (Software)

सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों का समूह है जो हार्डवेयर को नियंत्रित करता है।

उदाहरण:
MS Word
Photoshop
Tally

सॉफ्टवेयर के प्रकार

  1. System Software
  2. Application Software
  3. Utility Software

 

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)

ऑपरेटिंग सिस्टम वह सॉफ्टवेयर है जो पूरे कंप्यूटर को नियंत्रित करता है।
बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कंप्यूटर काम नहीं कर सकता।

उदाहरण:
Windows
Linux
Unix
MS-DOS

Windows के प्रमुख संस्करण:
Windows 95, 98, XP, Vista, 7, 8, 10,11

 

 

डेस्कटॉप एवं उसके भाग (Desktop & Its Components)

1. डेस्कटॉप स्क्रीन (Desktop Screen)

 

 

 

जब हम कंप्यूटर को ON करते हैं, तो जो पहली स्क्रीन दिखाई देती है उसे डेस्कटॉप स्क्रीन कहते हैं।

डेस्कटॉप पर निम्न चीजें होती हैं:
आइकॉन
टास्कबार
स्टार्ट बटन
नोटिफिकेशन एरिया
बैकग्राउंड इमेज

यह हमारा मुख्य कार्य क्षेत्र (Working Area) होता है।

 

2. बैकग्राउंड इमेज (Background Image)

डेस्कटॉप पर दिखाई देने वाली तस्वीर को बैकग्राउंड इमेज कहते हैं।
इसे वॉलपेपर भी कहा जाता है।

बैकग्राउंड बदलने का तरीका:

  1. डेस्कटॉप पर Right Click करें।
  2. Personalize चुनें।
  3. Background विकल्प चुनें।
  4. अपनी पसंद की तस्वीर चुनें।

 

3. आइकॉन (Icon)

 

 

आइकॉन छोटा चित्र होता है जो किसी प्रोग्राम, फाइल या फोल्डर को दर्शाता है।

उदाहरण:
This PC
Recycle Bin
Network
Paint

डेस्कटॉप शॉर्टकट क्या है?

यदि किसी प्रोग्राम या फोल्डर का आइकॉन डेस्कटॉप पर लाया जाता है, तो उसे Desktop Shortcut कहते हैं।

4. टास्कबार (Taskbar)

 

डेस्कटॉप के नीचे दिखाई देने वाली पट्टी को टास्कबार कहते हैं।

इसमें होते हैं:
Start Button
खुले हुए प्रोग्राम
समय और तारीख
नोटिफिकेशन एरिया

आप टास्कबार को Left, Right, Top या Bottom किसी भी दिशा में ले जा सकते हैं।

 

5. नोटिफिकेशन एरिया (Notification Area)

टास्कबार के दाईं ओर छोटे आइकॉन दिखाई देते हैं।
इसे Notification Area कहते हैं।

उदाहरण:
Sound
Network
Battery
Date & Time

 

6. स्टार्ट मेनू (Start Menu)

जब हम Start Button पर क्लिक करते हैं, तो जो मेनू खुलता है उसे Start Menu कहते हैं।

यहाँ से हम:
सभी प्रोग्राम खोल सकते हैं
सर्च कर सकते हैं
सेटिंग्स खोल सकते हैं

Start Menu खोलने की Shortcut Key:

Windows Key दबाएँ।

 

महत्वपूर्ण सिस्टम टूल्स (System Tools)

 

1. Recycle Bin

 

 

Delete की गई फाइलें पहले Recycle Bin में जाती हैं।

फाइल वापस लाने का तरीका:

  1. Recycle Bin खोलें
  2. फाइल पर Right Click करें
  3. Restore चुनें

Shift + Delete फाइल स्थायी रूप से हट जाएगी।

 

2. This PC (My Computer)

यह कंप्यूटर की सभी ड्राइव दिखाता है।

Shortcut: Windows + E

ध्यान दें:
Local Disk (C:)
में सिस्टम फाइलें होती हैं। इसमें अनावश्यक डेटा न रखें।

 

3. Sticky Notes

डेस्कटॉप पर नोट लिखने के लिए उपयोग होता है।

खोलने की Shortcut:
Windows + R
टाइप करें stikynot

 

4. Snipping Tool

स्क्रीनशॉट लेने के लिए उपयोग किया जाता है।

खोलने का तरीका:
Start
Snipping Tool खोजें

 

5. On Screen Keyboard

जब कीबोर्ड खराब हो जाए, तब स्क्रीन पर कीबोर्ड लाने के लिए।

Shortcut:
Windows + R
osk

 

6. Magnifier

स्क्रीन Zoom करने के लिए।

Shortcut:
Windows + Plus (+)
Zoom In
Windows + Minus (-)
Zoom Out

 

7. Narrator

यह फीचर स्क्रीन पर लिखी चीजों को बोलकर सुनाता है।

Shortcut:
Windows + R
narrator

 

8. Disk Cleanup

अनावश्यक फाइल हटाने के लिए।

Shortcut:
Windows + R
cleanmgr

 

9. System Information

कंप्यूटर की पूरी जानकारी देखने के लिए।

Shortcut:
Windows + R
msinfo32

 


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